ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखा ममता बनर्जी को कड़ा पत्र प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल ईश्वर की अनुपम कृति हैं महिलाएं : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 4.24 करोड़ के विज्ञापन पर घमासान, भूपेश सरकार के फैसले की जांच के संकेत
छत्तीसगढ़सूरजपुर

सशक्तिकरण पर ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम सम्पन्न : मुख्य वक्ता डॉ. रश्मि सोनकर ने कहा देश को श्रेष्ठ बनाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं की,

संवाददाता, सौरभ साहू :-

सूरजपुर  | मनेंद्रगढ़ एमसीबी,विद्या भारती द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं जनजागरण अभियान के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर झगराखंड में आयोजित ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. रश्मि सोनकर ने कहा कि देश को श्रेष्ठ और सशक्त बनाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला यह तय करे कि उसके घर में आने वाला धन ईमानदारी से आ रहा है या छल-कपट से, क्योंकि “जैसा होगा अन्न, वैसा होगा मन।”

डॉ. सोनकर ने संयुक्त परिवार व्यवस्था के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एकल परिवार के बढ़ते चलन से सामाजिक एवं पारिवारिक संबंध कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने बच्चों के मोबाइल उपयोग पर विशेष निगरानी रखने और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों को समझने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों बेटा-बेटी भेदभाव और दहेज प्रथा पर सबसे प्रभावी अंकुश महिलाएं ही लगा सकती हैं, क्योंकि सामाजिक कार्यक्रमों में अग्रणी भागीदारी उन्हीं की होती है।

एकल परिवार से सामाजिक व पर्यावरणीय नुकसान

चेतना महिला संगठन की अध्यक्ष एवं साहित्यकार अनामिका चक्रवर्ती ने कहा कि एकल परिवारों के बढ़ने से न सिर्फ सामाजिक विसंगतियां जन्म ले रही हैं, बल्कि पर्यावरण पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक परिवार के टूटकर तीन परिवार बनने से जरूरतें बढ़ती हैं जैसे तीन जोड़ी चूल्हे, फर्नीचर, दैनिक संसाधन आदि जिससे संसाधनों का अनावश्यक उपयोग और भोजन की बरबादी तक बढ़ जाती है।

परंपरा और संस्कृति की वाहक महिलाएं समिति सदस्य मीना त्रिपाठी ने कहा कि महिलाएं सदैव परंपरा और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करती हैं और नई पीढ़ी को संस्कारित करती हैं। महिलाएं परिवार संभालें, तो समाज और देश ठीक होगा।।

मुख्य अतिथि एवं नगर की प्रथम महिला प्रतिमा यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि महिलाएं अपने घर और परिवार को सही दिशा दें, तो समाज और देश की परिस्थितियां स्वतः ही सुधर सकती हैं। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।।

कार्यक्रम में व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, शैलेश जैन, चम्पा गौरी शाह, पार्षद सुनयना विश्वकर्मा, रोशनी मिश्रा, वंदना, सुषमा, गोमती, उर्मिला, प्रीति, काजल, कोमल, अंजलि, मुस्कान, जमाकर, गौरव मिश्रा, मृत्युञ्जय सोनी, सुशीला सिंह, उर्मिला जायसवाल, सुषमा कुशवाहा, पूनम पांडे, सरजू यादव, डॉ. तेजकांत सोनकर, सिम्मी जैन, प्राचार्य रामकृष्ण नामदेव, नीरज अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button